मै अपने दिल की बात मन की बात से बताना चाहता हू। कि मै एक छोटा सा ब्यापारी हू।इस समय कोरोना महामारी से कितना त्रस्त हू । ये हमारा दिल जानता है। मेरा ब्यापार डेढ माह से बन्द है। दकान का दर्शन नही हो पाया। कुछ भी समझ मे नही आता की मै क्या करू। कैसे अपना परिवार चलाउ। कहा से पैसे लाउ। जो कुछ पैसा था मेरे सब खतम हो गया । नगदी पैसा नही रहा मेरे पास बैक मे जाने पर पुरा डिस्टेनडिग का पालन करना पड़ता है।लाइन मे खडे खडे दो तीन घन्टे लग जाते है।लाकडाउन का पालन करते करते बोर हो गये। घर मे है सुरक्षित है। जो ब्यक्ति बाजार मे रह चुका वह घर मे बैठा है। ये तो हमारा दिल ही जानता है।उपर से बच्चो का सौख बीबी का सौख सब सेवाये पूरी करनी पड़ती है। ये उन लोगो को क्या पता कि कहा से आता है। कैसे आता ये तो हम जानते है।
मेरे दो बच्चे है। उन सब की पढ़ाई बर्बाद हो रही है। कुछ समझ मे नही आता की इनका भविष्य क्या होगा । इनके पढ़ाई मे बहुत सारे पैसे खर्च होते है।आमदनी एक पैसा की नही मेरी अर्थ ब्यवसाथा चरमरा गयी है।बच्चो की पढ़ाई इतनी महंगी हो गई है । कि मै कहा से इनकी फिस भरूगा।मेरे जैसा छोटा मोटा ब्यापारी नही पढ़ा सकता । लेकिन क्या करू जब बच्चो का भविष्य बनाना है तो मेहनत तो करनी ही पड़ेगी ।कैसै अपने बच्चो को पढि रहे है ये हमारा मन ही जानता है।
कही से आमदनी का जरिया दिखाई नही देता । जिनके यहा उधार भी है। पैसा देने से इनकार कर देते है। सरकारी योजना का लाभ भी हमे प्राप्त नही होता । राशन खाने की ब्यवस्था सब करनी पड़ती है।भले बन्दी हो लेकिन पेट तो नही बन्द है। कही से ना कही से तो ब्यवस्था करनी ही पडती है। भगवान भरोसे जीवन यापन हो रहा है। देखते है नयी दुनिया मे कब वापसी होती है। मै अपनी मन की बात कह डाली ये सब आप पर निर्भर करता है की आप क्या सोचते है। जय राम जी की ।।।।।
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उपेंद्र अजनबी सेवराई
गाजीपुर (उ प्र )
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