वीर सुहागन-प्रियंका

ब्याही थी वो,उस वीर के संग
कुछ बरसों का वो रिश्ता था
सात फेरों से,सात जन्मों का 
ये कैसा अनूठा नाता था।।


मात्रभूमि का लाल था वो अब
बस गोद में उसकी समा गया
सोलह श्रृंगार ले, ब्याहता के
वो सोलह वर्ष में चला गया।।


सिंदूर भरी थी मांग में , 
फूलों में सजाकर लाया था
आज खुद सजा है फूलों में
क्या  नियति तेरी माया है


हाथो से दी अग्नि चिता को
हर एक आंख वो रुला गई
रोते रोते जो विदा किया
हर  रूह,भीड़ में कंपा गई


कुछ वर्षों का साथ वधू से
कुछ लम्हों में ही छुड़ा गया
छोड़ चला अकेला पथ पर
और वीर सुहागन बना गया
छोड़ चला अकेला पथ पर
और वीर सुहागन बना गया।।



जयपुर के वीर शहीद आशुतोष शर्मा को शत शत नमन


प्रियंका गौड़
जयपुर