गीत ऐसा लिखॅू-नीता

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सर्वश्रेष्‍ठ रचना


प्रेम का गीत ऐसा लिखूं मैं पिया
प्यार ही प्यार जिसमें भरा हो पिया


वह भी ऐसा जो सागर से गहरा रहे
मैं नदी बनके उसमें समा ऊं पिया
प्रेम का गीत ऐसा लिखूं मैं पिया


तुम जो बन जाओ कृष्ण तो क्या बात है
राधा बन प्यार में मैं भी खो जाऊंगी
बंसी का स्वर बनू फिर तुम्हारे पिया
सारा ब्रज धाम गूंजेगा सरगम से पिया
प्रेम का गीत ऐसा लिखूं मैं पिया
बनके बदरा जो छा जाओ कड़ी धूप में
बदली बनके गगन में मैं भी आ जाऊंगी
बरसे यूं ही धरा पर आज हम पिया
सारी सृष्टि समा जाए इस प्यार में
प्रेम का गीत ऐसा लिखूं मैं पिया


नीता चतुर्वेदी 
विदिशा