जब हम स्वपन को पुकारते हैं तो वह हमारी आत्मा से लिपट जाता है | स्वपन का हमारी आंखों में बसंत की तरह उतरना स्वपन ले जाता हमें एक नई दुनिया की तरफ स्वपन का हमें अपने आप से निकालना |यह किसी भी वक्त आता और किसी भी वक्त उड़ती चिड़िया की तरह चला जाता | स्मरण शक्ति स्वपन से साक्षात्कार होने के बाद बढ़ने सी लगी |आंखों में एक अलग अनोखी सीे नमी में रह गई जीवन नई अच्छाइयों से चमकने लगा |स्वपन मुझे बहुत कुछ देकर चला गया और मैं होश में भी बेहोश होने के सामान रही |स्वपन मुझे एक नया जोश स्फूर्ति दे |मेरे जीवन में नई प्रतिज्ञा सी ग्रहण करा गया |जब स्वपन जाता है तो हम उसे पुकारने की हिम्मत भी नहीं करते | यही जीवन की सच्चाई हम टाल नहीं सकते |
नाम पूजा सैनी
नई दिल्ली
इमेल-poojasaini19981@gmail.com
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