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भइया अइहँय लइ जवावय हो नैहरवा सावन रितु आयी ननदी
बदरा गरजय बिजुरी चमकय जम के बरसै पानी
दादुर मोर कोयलिया गावय झूमय बरखा रानी
आवन कय दे रहा सँदेसा कउवा बइठ अटारी
नेहा तरसे राह देखते कर बैठी तैयारी
बचपन की सखियन से होये हो मिलनवा सावन रितु आयी ननदी-------
इतनी खुश हइ आज सखी रे माई बाबू मिलिहैं
छोटी बहिनी भैयन से मिलि मनके फुलवा खिलिहैं
रहिया बाग बगीचा सब तौ मनमा बसे हमारे
भूलीं कहाँ हई अठखेली कवनव द्वार ओसारे
अमवा की डारी पा झुलबय हो झुलनवा सावन रितु आयी ननदी .....
रक्षा बंधन तीज अउर त्योहार मने सब नीकय
खुशी खुशी हम लउट के अउबय आशीष लइके सबकय
भेज दिहू तू आपन भइया सावन बीते तुरतै
दुखी न होवा एक महीना जल्दिन हँसिके बीतै
बदरी छाई बा देखा तो हो गगनवा सावन रितु आयी ननदी .....
ओम प्रकाश शुक्ल
दिल्ली
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