मधुर सावन-डॉ नीरज




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सावन में घन मेघ घिरे सखि,बून्द सरोवर गावत रागिनी,
कोकिल गान करे मधु सुंदर,अम्बर कौंधत चंचल दामिनी।
पैजन सी मधु तान करे जल,तुंग ढके लखि श्यामल मेह री,
गीत सुनाय हवा में मोहक,नैन सुप्रीत बसे नित नेह री।

मोर करें वन नृत्य सुहावन,झांझर पात बजे शुचि मोहनी,
ढोल बजे बदरा गरजे जब,राग धरे सलिला शुभि सोहनी।
सागर झूम हिलोर मचावत, ढोलक सी सरिता मद बावरी,
मादक मोहक चंचल साँवरी।

नीर भरे सब ताल मनोहर,कुंतल मेघ धरा घन झूमते,
घोर घटा बरसे मद सावन,शीतल बूंद हिया सखि चूमते।
पावस पावन मेघ मन भावन,संग पिया मन रंग  सुहावनी,
मेघ घने बरसे शुचि सावन,झूल रहीं सखि रीत लुभावनी।

मोदित अंबु धरा मिल शोभित,घूँघट प्रीत धरा मुख ओढ़ती,
प्रीत भरे वसुधा मन मोहित,मादक सा रस पावन घोलती।
माणिक बूंद सजी वसुधा पर,पावस नीर सुवास सुहावनी,
नृत्य करें लतिका शुचि भावन,
भीग सुधा रस डूब सुरागिनी।


डॉ नीरज अग्रवाल नन्दिनी
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)