पिता जी -मनीषा

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हमारे प्यारे पिता,  दिल में  बसते है पिता।
बिन बोले हर इच्छा पूरी करते है पिता।
घर के सारथी है पिता, ईश्वर का रूप है पिता।
दुखों की घाम में छाया,गमों की शीत में धूप हैं पिता।
कभी मेरा गर्व हैं, कभी स्वाभिमान हैं पिता
कभी सागर, तो कभी आसमान हैं पिता
साहस हैं, संबल हैं,   शक्ति हैं पिता।
श्रृद्धा हैं,पूजन हैं,भक्ति हैं पिता।


मनीषा जोशी
खोपोली महाराष्ट्र