महकेंगी हथेलियाँ
गुलाब की तरह
राह के कांटे जो चुनोगे
राहगीरों के राहों के
जीवन सारा महकेगा
इत्र की तरह
खुशबू दूर दूर तक
फैलेगी तेरे नाम की
और की प्रशंसां में
लब जो खोलोगे ।
स्तुति की तरह
जनजन तुझे पुकारेगा
सेवा जो मानव की करेंगा
परोपकार को जो धारण करेगा
महकेगा उसका सारा जीवन
मोगरे की तरह
हर दिन , हर सुबह गुलाब की ख़ुशबू देगा .
जिंदगी महकती सुबह है चलते रहिए लक्ष्य की ओर ...
हौले हौले ही सही पग बढाते रहिए मंज़िल मिल ही जायेगी
जीवन हमारा गुलाब के फूलों की तरह
खिलना तो है , महक बिखेरना है
पर वक्त जुदा जुदा है सबका
कब कामयाबी हासिल होगी
यह पता नहीं किसी को ..
बस मुस्कुराते रहियें अपने कर्मों की
ख़ुशबू से जग को महकाते रहिये ..
अलका पाण्डेय /
9920899214
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