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प्रिय अलविदा तुमको
मेरा नमन तुमको
साथ मेरा तुम्हारा
था यहीं तक
अब कभी याद आओगे
तो बहेंगे बस आंसू
इस उदास दिल का
सहारा बनेंगे ये आंसू
अब न मुलाकात ही होगी
न इन्तजार ही होगा
अलग अलग मंजिल के ही तो
हम दोनों थे मुसाफ़िर
न तुमसे अब कोई
गिला होगा न कोई शिकवा
अफ़सोस है तो बस यही
जिसे दिल में जगह दी
वही उस दिल को समझ न पाया
दूरी का अब क्या
जब नजदीकी में ही फासला था
नीलम शर्मा विकासनगर देहरादून
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