बेरुखी -इदु

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तेरी बेरुखी के बाद भी ऐ मेरी प्यारी ज़िन्दगी ..!
बार-बार गले से लगाया है तुझे ही ऐ जिंदगी ..! !
तू भी तो एक बार गले से लगा ले मुझे ऐ ज़िन्दगी..।  
तेरी आस ,तेरी ही आरजू में जी रहे है ऐ ज़िन्दगी ..!!
तुम से ही तो मुस्कुराना भी  सीखा है ऐ जिंदगी...।   
तू भी तो एक बार मुस्कुरा दे मेरे संग ऐ जिंदगी। !  
किस से कहें हम दर्द ,जो जप्त सदियों से है.. 
अन्तस में ऐ ज़िंदगी।  
तू नहीं है तो अपना कहने को कुछ भी तो 
नहीं है ऐ जिंदगी।!
ठोकर भी लगाती है,शूल भी चुभाती है तू ऐ 
ज़िन्दगी...!
अँधेरा करने से भी नही पिछड़ती है तू ऐ 
जिंदगी...!!
कभी तो रौशम कर इस जहाँ को तू ऐ ज़िन्दगी...!
फूल न सही काँटों पर चलने की हिम्मत तो 
बढ़ा ऐ ज़िन्दगी...
आजा संग मेरे तू भी ज़रा हँस ले ऐ ज़िन्दगी...!!


इंदु उपाध्याय पटना