इंदु की ग़ज़ल

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दिल के द्वार पे दर्द हमेशा, दस्तक देता रहता है...!
दिल ना जाने कहाँ है खोया, दर्द को ढूँढता रहता है...!!


आँखें नम पलकें हैं भींगी,दिल करता चित्कार बहुत...!
स्याह समुद्र विशाल पडा , बादल को देखता रहता है...!!


सुनी आहट, सपने सुने, सुनी  हैं अब राह कठिन...!
सपनों को रौशन करने को...दिल सपने देखा करता है...!!


आह की आह में दर्द बहुत है...दर्द बहुत है रिश्तों में...!
बेगानों में दिल बेगाना ...मुझको तकते रहता है...!!


शिकवा किसी से क्या करना पल-पल ये कहता रहता है..!
जीवन के जंग को जीतने की सदा ये देता रहता है..!!


इंदु उपाध्याय पटना