घनघोर घटा- राजश्री




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सावन की घनघोर घटा ,
जब चहु और छा जाए 
तपती बंजर धरती भी गीत 
खुशी के गाए । 


मिट्टी की सौंधी सौंधी खुशबू
हर तन मन को महकाए 
चहु और हरियाली नाचे 
प्रकृति संग मनवा भी झूलन लागे ।


सुर ताल को संजोकर ,
झरनों का मनभावन कलरव
नदिया से मिलन को आतुर हो जाए 
ऐसे मदमस्त समा में 
 हर मन बहक जाए 
पिया से मिलन के गीत वह झूम झूम कर गाए।


दिल के समुंदर में ,
प्यार की लहरे उमड़ घुमड़ बहती जाए
पिया के आने का ,
खुशियों भरा पैगाम 
पा दिल बाग बाग हो जाए ।


नैना उनसे उलझ जाए 
मनमयुर नाचन लागे 
जब दस्तक उनकी हो जाए 
चंचल ,शरारती निगाहों में हम 
स्वयं कैद हो जाए    ।


खुदसे बिछड़कर हम ,
साथी  संग मुस्काए 
सावन की फुहार हर ,
दिल को लुभा जाए ।


याद उनकी आते ही ,
सिरहन सी दौड़ जाए
मनभावन यह सावन 
सपनो की सौगात ले आए 
हर मन प्रीत के  रंग में रंग जाए ।


             राजश्री राठी 
               " श्री "
         अकोला ( महाराष्ट्र )