बना लिया बाजार हृदय को देखो हम खुशहाल हो गये
कोई वर्जना क्या रोकेगी ? हम तो अब नेपाल हो गये !
मन के संसद में बैठक कर नूतन अध्यादेश बुना है
विस्तृत होगी प्रीत-परिधि हमने नव- निर्देश चुना है।
ठुकरा दिये पुराचीन रिश्तें नये सफर में नया साथ है
नाच सकेंगे हद तोड़ कर, ताल-तरंगी यार पास है ।
साथ मिला है लहर कारीगर अब हम बेमिसाल हो गये
कोई वर्जना क्या रोकेगी ? हम तो अब नेपाल हो गये !
जान रहा हूँ जुडा है साथी ,केवल तुम्हें जलाने खातिर
छद्मवेशी है ये भी तय है और अंदर का काला,शातिर।
लेकिन अभिनय का मतवाला रंगमंच पर साथ रहेगा,
हम नाचेंगे यवनिका पर भीतर वो कारामात करेगा ।
सोचों,बज गई यदि तालियां,हम तो मालामाल हो गये!
कोई वर्जना क्या रोकेगी ? हम तो अब नेपाल हो गये !
भूल गये भूचाल हाल के, जब तेरे कांधे पर माथ था
अमावस में ढ़की पूर्णिमा स्याह पलों में तेरा साथ था ।
विस्मृत हुई पुरानी बातें मंदी कल की-संधि कल की,
सत्य-सनातन नेह तुम्हारा अंतर्मन की जो हलचल थी।
फाड़ दिये पुरानी चिट्ठियां,पढ़-पढ़ जिसे निहाल हो गये
कोई वर्जना क्या रोकेगी ? हम तो अब नेपाल हो गये !
पंकज बसंत मुजफ्फ़रपुर बिहार
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