जब मेरा देश पुकारे हो जाऊँगा बलिदान-लाल देवेन्द्र







 

जब भी मेरा देश पुकारे हो जाऊँगा बलिदान,
भारत माँ से होती है जग में मेरी सच पहचान।

राणा प्रताप और वीर शिवा जी बन जाऊँगा,

आंच नहीं आने दूँगा चाहे हो जाऊँगा क़ुर्बान।।

 

भगतसिंह व वीर सुभाष जैसे यहाँ जन्म लिए,

जब भारत माँ ने पुकारा कितने ने प्राण दिए।

हँस कर गले में डाल लिए फाँसी के फंदों को,

जब देश पुकारे लोग न जान की परवाह किए।।

 

देश पुकारा गांधी जी आज़ादी की लड़े लड़ाई,

कितना भी जोर लगाए अंग्रेजों ने मुँह की खाई।

अनगिनत माँओं ने अपने सपूत कर दिए कुर्बान,

देशभक्तों ने लड़ कर भारत की आज़ादी लाई।।

 

देश पर कोई आँख दिखाएँ, सहन न कर पाएँगे,

मेरा देश पुकारेगा जब भी न्यौछावर हो जाएँगे।

राजगुरु व बटुकेश्वर दत्त के हम हैं सच्चे संतान,

ऐसी टक्कर देंगे दुश्मन के परखच्चे उड़ जाएँगे।।

 

सदियों से ही रहा है हमारा यह भारत देश महान,

जगतगुरू बन कर ही सदैव होता रहा है गुणगान।

मेरा भारत देश पुकारे जब भी दुश्मन पे टूट पड़ूंगा,

अंतिम साँसों तक भारत का न होने दूँगा अपमान।।

 








सादर





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