गड़बड़ झाला संस्था के मालिक गरीब दास जी को खरबूजे की खेती करते हुए देख प्रत्येक इंसान अचंभित था | एक दो से रहा नहीं गया...पूछ ही बैठे,"भईया, अब तुम भी शुरू हो गए... पहले क्या कम लोग थे इस धंधे में? "देखना, ये खेती मेरी भी किस्मत चमका देगी | भेड़ चाल का जमाना है, सभी एक दूसरे के पीछे बस इस अंधी दौड़ में भागते ही रहते हैं | जरूरत है तो थोड़े से नेतृत्व की | लोगों की भीड़ इक्ट्ठा होने में देर की सम्भावना ही नहीं... तुम बस देखते जाओ, हींग लगे न फिटकरी,रंग चोखा |
सच ही तो है, खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है | प्रत्येक क्षेत्र में यही तो हो रहा है | लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सभी अपनी -अपनी दुकानें सजाकर बैठे हैं | संस्था के नाम पर अपना उल्लू सीधा करने वालों की कमी नहीं है | ऐसा लगता है मानो संस्था न हो, कोई खरबूजे की खेती हो |
किरण बाला
(चंडीगढ़ )
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