रात की तन्हाईयो में
चाँदनी रातों में
एक टक चाँद को देखा करती
और तुम्हारे प्यार का तार झनझना उठता !
चाँद का सौन्दर्य
मेरे नयनो में समा जाता !!
मन के पटल पर स्मुतियो की
कोमल लहरे पलकों
पर हलचल मचाती !
मन व्याकुल हो चाँद से
आग्रह करता है ..!!
मेरी अकुलाहट कम करो
साजन के घर जाओ !
खिड़की से उन्हें बुलाओ
मेरा संदेशा देआओ !!
मेरी कविता के कुछ
लफ़्ज़ों को सुन वो चले आए !!
धरा की सौंधी सौंधी मिट्टी की महक,
उदास मन में भरती
शीतल जल सी शीतलता !
तुम्हारी यादे गर्मी की तपती
धरा पर नन्ही नन्ही वर्षा की बूँदें
में नदी की लहरों सी नाच उठती!!
चाँद अपनी रोशनी की बाँहें फैला
मेरे ख़्वाबों को होले होले हवा देता ..
नीलगगन पर श्वेत धवल सा चाँद ,
आज मेरे द्वारे आ गया
अपनी मुस्कान से बहुत सी
अनकही बातें सुलझा गया !
और मुझे प्यार से सहला कर कह गया !
चाँद कभी बेवफ़ाई नहीं करता !!
तुम्हारा चांद भी आयेगा ,
तब तुम पूरी कविता उसे
सुनाना !!
अलका पाडेंय (अगनिशिखा मंच)
देविका रो हाऊस प्लांट न.७४ सेक्टर १
कोपरखैराने नवि मुम्बई च४००७०९
मो.न.९९२०८९९२१४
ई मेल alkapandey74@gmail.com
Social Plugin