पति से पहली लड़ाई-रंजुला

"पति से पहली लड़ाई "।
नव विवाहिता --सी ,
उस संध्या मैं सिमटी सकुचाई थी 
अधरों पर प्रीत की लाली लगाए ,
नयनो में कजरा ,बालों में गजरा,
माथे पर सिंदूरी बिंदिया चमक 
रही थी ।
गुलाबी साड़ी मुझ पर ,
खूब फब रही थी।
खुद को स्वर्ग की अप्सरा से ,
कम मैं ना समझ रही थी ।
नयनों में अनुराग लिए ,
दिया लिए पिया के ,
सामने खड़ी थी।
छलनी उठा के चन्द्र को ,
अर्घ्य दिया ,चरण छुए 
साजन के ,
वे बीना के गीतमाला की तरह,
गा उठे -- " गर तुम टल जाओ ,
     दूसरी ले आएंगे हम ,
ज़माने को देख लेंगे हम "।
ये गीत ने असर हम पर किया ,
चकला बेलन से हुई लड़ाई ,
करवाचौथ की नायिका ,
दुर्गा बन शक्ति दिखलाई ।


रंजुला चंडालिया कुमुदनी ।