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रिमझीम रिमझीम पडे फुहार
उमड़ घुमड़ कर बरस पड़ें बादल
वन उपवन सब हो जाए खुशहाल
गरमी को चटा रही बारिश धुल
रिमझीम रिमझीम बरसे बादल
पर्वत झरने झूम झूम लहराते
मोर मदमस्त मगन हो नाच रहे
कोयल हो के मगन मस्त गा रही
रिमझिम रिमझिम पढ़ें फुहार
मन को बहुत लुभाए , हर्षाए
चपला भी चम चम चमक रही
धरा हो गई मगन फूल महके डाली डाली।
रिमझिम रिमझिम पढ़ें फुहार
झूले पडे और गौरी झूले झूलना !
कल कल करती नदियां लहरे
इठलाती बलखाती,
मानो जल तरंग संगीत सुन ,
नया नृत्य कर रही लहरे
रिमझिम रिमझिम पढ़ें फुहार
किसानो को दिखे लहराती फसल !
प्रेमी प्रेमिका के मन प्रेम की जले ज्योत ।
जीवन का सारा विषाद बहा ले जाए।।
रिमझिम रिमझिम पढ़ें फुहार
गर्र्मा गर्मा पकौड़ी मिलकर खाए
उस पर गर्म चाय की चुस्की पाए
बारिस का पुरा हम लुफ्त उठाए !!
डॉ अलका पाण्डेय
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