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सावन में लग गई आग
हो रामा सावन में लग गई आग
पिया नहीं संग में आज
जैसे बिगड़े हमारे भाग
हो रमा--------
घिरी घिरी आवें बादल काले
झूमत गरजत लगे मतवाले
सूनी सेज काटे जैसे डंसे नाग
सावन में लग गई आग
हो रमा---------
आया है आज सावन झूम के
बहके रहे जियरा आज सबके
कहीं लगे झूले कोई गाये कजरी
सखियाँ सब गावें मल्हार राग
सावन में लग गई आग
हो रामा ---------------------
साजन जा के बसे परदेश
भेजे नहीं कभी कोई संदेश
रिमझिम रिमझिम बरसे सावन
जले बदन कुछ ऐसे
जैसे लगे बदन में आग
हो रामा-----------------
पापी पपीहरा पिऊ पिऊ बोले
पिया के सनेसवा कोनों ना मिले
अँगना उतरे नहीं काग
हो रामा-----------
दादुर मेढ़क झींगुर शोर करें सब
इंतज़ार में बैठी साजन आएं अब
विरह की आग में जल रही मैं
लगाई सावन ने आज ये कैसी आग
हो रामा -------------
मन तड़पे और सुलगे बदन
कैसी अगन ये कैसी अगन
सब लोग कहें बरसे पानी
मैं कहूँ नहीं आज बरसे आग
हो रामा -----------------
सावन में लग गई आग
दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता
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